संदेह

🌻🌻 शक 🌻🌻 माता *भगवती बगला परमेश्वरी को प्रणाम करते हुए मैं अपनी वार्ता को बढ़ा रहा हूं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, कहते हैं जब धरती फटने लगे दरार पड़ जाए तो मेघों के द्वारा जल बरसाने से दरार बंद हो जाती है वस्त्र फट जाए सिलाई करने पर जुड़ जाता है चोट लग जाए दवा के लेप से घाव ठीक हो जाता है

🌻🌻 शक 🌻🌻 माता *भगवती बगला परमेश्वरी को प्रणाम करते हुए मैं अपनी वार्ता को बढ़ा रहा हूं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, कहते हैं जब धरती फटने लगे दरार पड़ जाए तो मेघों के द्वारा जल बरसाने से दरार बंद हो जाती है वस्त्र फट जाए सिलाई करने पर जुड़ जाता है चोट लग जाए दवा के लेप से घाव ठीक हो जाता है किंतु यदि मन फट जाए मन में संदेह आ जाए मन में विकार आ जाए मन में गलत धारणाएं बन जाए उसका कोई उपाय कारगर नहीं होता है आज मैं सत्य घटना का वर्णन नाड़ी ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार करता हूं एक जातक था जिसका काल्पनिक नाम रमेश था उसकी शादी 2014 में होती है उच्च पद सरकारी नौकरी शिक्षक पद पर कार्यरत है उसकी शादी नवंबर 2015 में बड़े धूमधाम के साथ इंजीनियर लड़की के साथ हो जाती है पूरा परिवार खुशहाल रहता है कहानी में तब बदलाव आता है कि जनवरी 2016 में लड़की गर्भवती होती है और अल्ट्रासाउंड कराया जाता है अल्ट्रासाउंड में गर्भस्थ शिशु की आयु शादी से 20 दिन पूर्व इंगित हो रही थी यह कीड़ा पंकज को ऐसा लगा वह निकिता(काल्पनिक नाम) से जो काल्पनिक नाम है पीछा छुड़ाने के लिए कसम खा ली और उसकी स्त्री ने तलाक न देने की कसम खा ली दोनों आज भी लड़ रहे हैं कचहरी जा रहे हैं इसी झगड़े में पंकज के पिता की मृत्यु हो जाती है माता भी तनाव के कारण बहुत कमजोर हो गई है स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित नहीं है कई बार समझौते हुए कई बार मीटिंग हुई लेकिन रिजल्ट जीरो रहा आज हम रमेश की कुंडली का विश्लेषण नाड़ी ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार करते हैं। देखिए जब किसी भी व्यक्ति का दांपत्य जीवन देखना हो स्त्री का सुख देखना हो दांपत्य जीवन का सामंजस्य देखना हो उस समय आपको पुरुष की कुंडली में लग्न लग्नेश सातवें भाव और सप्तमेश शुक्र और मंगल को देखना चाहिए। १ जातक की कुंडली में सातवें भाव का स्वामी मंगल है जो अष्टम भाव में बैठा है अनिष्ट भाव के स्वामी सूर्य के साथ बैठा हुआ है सातवां भाव पुरुष की कुंडली में स्त्री के विषय में बताता है स्त्री के गुण धर्म को बताता है सातवें भाव का स्वामी जब कभी भी 6 8 12 भाव में बैठता है तो कमजोर हो जाता है मंगल का आठवें भाव में बैठना सप्तमेश होकर के आठवें भाव में बैठना मंगल की ताकत को कमजोर कर रहा है उसके साथ अनिष्ट भाव का स्वामी सूर्य का बैठना मंगल की स्थिति तात्कालिक तौर से और भी खराब करता है सप्तमेश अष्टम में बैठता है तो वैवाहिक जीवन के लिए बहुत शुभ प्रद नहीं होता है गृहस्थी को बसने नहीं देता है पुरुष की कुंडली में गुरु जीव कारक होता है जातक का गुरु नीच राशि में चतुर्थ भाव में बलहीन हो करके बैठा है गुरु में वर्तमान की कुंडली के अनुसार तीन भाव और 6 भाव के गुण हैं इसलिए गुरु यहां पर मदद करने की स्थिति में नहीं है गुरु की मनसा तात्कालिक रूप से मदद करने की नहीं है दूसरा बिंदु यहां पर यह है गुरु यहां पर कमजोर है क्योंकि नीच राशि का है गुरु के दूसरे और बारहवें भाव में कोई भी ग्रह नहीं बैठा है नाड़ी ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रहों का केमद्रुम योग होता है इसलिए गुरु यहां पर केमद्रुम योग में है गुरु की दृष्टि जब मंगल और सूर्य पर पड़ती है तो धर्म त्रिकोण एक्टिव हो जाता है गुरु यद्यपि कमजोर है लेकिन गुरु नैसर्गिक रूप से कल्याण करने वाला है आशीर्वाद देने वाला है वरदान देने वाला है गुरु की आत्मा में वरदान देने के गुण हैं तात्कालिक रूप से कितना भी खराब हो लड़ाई झगड़े कुछ भी हो लेकिन उसकी भावना गलत करने की नहीं होती है वह अपनी ताकत के अनुसार जातक को कहीं ना कहीं कुछ अच्छा भी करेगा वही किया गया गुरु सूर्य और मंगल तीनो मिल गए धर्म त्रिकोण एक्टिव हो गया जिसके कारण जातक को एक अच्छी नौकरी मिली मित्रों जब भी गुरु और मंगल की युति होती है ऐसे जातक शारीरिक रूप से बलिष्ठ होते हैं अहंकारी गुस्सैल भी होते हैं जब गुरु पर मंगल और सूर्य का प्रभाव पड़ा नाड़ी के अनुसार गुरु जीव कारक मंगल गुस्सा अहंकार का कारक सूर्य स्वाभिमान का कारक जातक में स्वाभिमान और अहंकार दोनों चीजें आगे अष्टम के कारण इनमें आइडियल और जिद्दीपन भी आ गया क्योंकि अष्टम भाव हमेशा समझौता करने की नियत में नहीं होता है वह आर-पार की लड़ाई लड़ता है उसको जो देना होता है वह देता है जो नहीं देना चाहता है उनकी मुक्ति कर देता है। जातक में अहंकार आ गया स्वाभिमान भी आ गया सप्तमेश अष्टम में बैठ गया गृहस्ती बसने में दिक्कत होगी। अब जरा सातवें भाव का नजारा देखिए सातवें भाव पर बुध चंद्र और राहु बैठे हुए हैं मित्रों कलंकित करने वाले दो ही ग्रह होते हैं एक चंद्रमा और दूसरा बुध चंद्रमा बुध की युति जब कभी भी एक साथ होती है तू जीवन में कलंक योग का निर्माण होता है चंद्रमा प्रेम भावना करुणा कोमलता लावण्य स्नेह वात्सल्य ममता शैशवावस्था का कारक होता है बुध चंद्रमा की अवैध संतति है ऐसा पौराणिक मत कहते हैं जब

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