लेखक बनने का योग

लेखन का पौधा अध्ययन रूपी खाद पठन-पाठन रूपी पानी के साथ फलता फूलता है इस पौधे को यदि एकाग्रता तीव्र स्मरण शक्ति अतुलनीय प्रतिभा संवेगात्मक हृदय की भूमि मिले तो इसे पनपते और बढ़ते देर नहीं लगती कहा जाता है जिस व्यक्ति पर देवी सरस्वती की कृपा हो जाए उस व्यक्ति की लेखनी को संसार भर में प्रसिद्धि मिलती है

लेखन का पौधा अध्ययन रूपी खाद पठन-पाठन रूपी पानी के साथ फलता फूलता है इस पौधे को यदि एकाग्रता तीव्र स्मरण शक्ति अतुलनीय प्रतिभा संवेगात्मक हृदय की भूमि मिले तो इसे पनपते और बढ़ते देर नहीं लगती कहा जाता है जिस व्यक्ति पर देवी सरस्वती की कृपा हो जाए उस व्यक्ति की लेखनी को संसार भर में प्रसिद्धि मिलती है आज हम इस बात को ज्योतिष की दृष्टि से समझेंगे एक आदर्श लेखक बनने के लिए ज्योतिष ने इस शास्त्र ने क्या निर्णय दिया है। १ ज्योतिष में बुध को मस्तिष्क का बुद्धि का अध्ययन का और व्यवहार का कारक माना जाता है । बुध लेखन का भी कारक होता है केतु कलम का कारक होता है जब बुध के साथ केतु जुड़ जाता है तो कलम बन जाती है। नाड़ी ज्योतिष के अनुसार स्वागृही या उच्च बुध के साथ यदि केतु की युति हो जाए ऐसा ऐसा जातक बहुत बुद्धिमान होता है यदि इसी योग में गुरु का संबंध बन जाता है तो बुद्धि में ज्ञान भी आ जाता है बुध बुद्धि केतु कलम गुरु ज्ञान बुध को यहां पर किताब भी मानेंगे इसीलिए कहा जा सकता है बुध का संबंध जब गुरु केतु से होता है तब व्यक्ति लेखन कार्य में सफल हो सकता है। २ अब देखिए बुध केतु के साथ तीसरे भाव के स्वामी का संबंध होना आवश्यक होता है तीसरा भाव हाथों का होता है तीसरे भाव के साथ जब बुध केतु का संबंध बन जाता है तब व्यक्ति लेखक होता है आपने देखा होगा लेखक पत्रकार कवि कथाकार किसी भी प्रकार की लेखनी के प्रयोग करने वाले व्यक्ति की कुंडली में बुध मंगल और तीसरा भाव मजबूत होता है मंगल को स्याही का कारक भी माना जाता है। तीसरे से तीसरा भाव अर्थात पंचम भाव जिसे कहते हैं उससे शिक्षा अध्ययन पठन-पाठन का विचार किया जाता है इस भाव से ज्ञान विद्या पढ़ने की रुचि का विचार होता है जब कभी लग्न लग्नेश और तीसरे भाव का संबंध बने तो व्यक्ति लेखन से जुड़ा हो सकता है लेखन के क्षेत्र में अपना हाथ अजमाता है। वैदिक ज्योतिष के कुछ ग्रंथों में कहा गया है पंचमेश का नवम भाव में होना या नवमेश से संबंध बनाना लेखक बनने की निशानी होती है जबकि नाड़ी ग्रंथों में कहा गया है जब भी बुध का संबंध गुरु से और शुक्र से बनता है तो सरस्वती योग बन जाता है जिनकी कुंडली में सरस्वती योग होता है ऐसे व्यक्ति लेखन में निपुण होते हैं अगर केतु का संबंध भी बन जाता है जातक जीवन में आगे बढ़ता है लेखन में आगे बढ़ता है उसकी लेखनी की सराहना हमेशा रहती है देखिए जीवन में सफलता पाने के लिए लेखनी का संबंध कर्म से भी जोड़ना चाहिए यदि लिखने का संबंध कर्म से जुड़ जाएगा तभी व्यक्ति अच्छा लेखक बनेगा लेखन को ही जीविकोपार्जन का साधन बनाएगा यदि शनि का संबंध बुध से गुरु से केतु से शुक्र से बनता है ऐसे व्यक्ति अपनी लेखनी के कारण संसार में प्रसिद्ध होते हैं क्योंकि सनी ही व्यक्ति को कलज्जयी बनाता है। जब सनी के आसपास पंचायत लगी होती है तभी व्यक्ति अपने लेखन के कारण या अपने गुणों के कारण इस संसार में प्रसिद्ध होता है।

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